कैलिग्राफी के जादूगर, श्यामलन

खाकी वर्दी में न जाने कितने ही हुनरमंद चेहरे छिपे हुए हैं। कैलिग्राफी के जादूगर पी. पी. श्यामलन उन्ही में से एक हैं जिन्होने अपनी खूबसूरत कैलिग्राफी की बदौलत एक बार नहीं, बल्कि चार बार लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया हैं और चौथी बार भी ये अवार्ड अपने नाम करने वाले हैं।

केरल के रहने वाले पी. पी. श्यामलन की शुरुआती पढ़ाई – लिखाई एर्नाकुलम जिले के छालिक्यवट्टम गांव में हुई। बात उन्ही दिनों की है जब श्यामलन चौथी क्लास में थे, एक दिन मां ने उनकी लेखनी देखकर अच्छी राइटिंग में लिखने की सलाह दे डाली, फिर क्या था श्यामलनजी ने मां की कही बातों को गांठ बांध लिया और उसके बाद सफेद कागज पर मलयाली में कैलिग्राफी करने का अभ्यास शुरू कर दिया, और तब से लेकर आज तक उन्होने मां की कही बातों को याद रखा और अपनी लेखनी में दिन प्रतिदिन सुधार करते चले आए। श्यामलन कहते हैं कि केरल में रहने के दौरान वो सिर्फ मलयाली भाषा में लिखते थे। लेकिन केरल से दिल्ली आने के बाद उनकी जिंदगी में एक नया अध्याय और जुड़ गया। यहां आकर श्यामलनजी ने मलयाली के बाद अंग्रेजी में कैलिग्राफी कर खुद को एक नए मुकाम तक ले आए।

पी. पी. श्यामलन अंग्रेजी भाषा के 12 अगल- अलग फॉन्ट में कैलिग्राफी करते हैं। उनकी करिश्माई लेखनी का कमाल ही ऐसा है कि कंप्यूटराइज्ड फॉन्ट भी मात खा जाए। इनके हाथ से लिखी गई कैलिग्राफी में बड़ी ही खूबसूरती से एक- एक शब्द निखरकर आता है जो देखने में इतना सुंदर लगता है मानों किसी ने कंप्यूटर या टाइपराइटर से कैलिग्राफी की हो। श्यामलनजी मलयाली और अंग्रेजी में कैलिग्राफी बहुत ही तेजी से करते हैं। यूं कहें की कैलिग्राफी करते वक्त इनके हाथ की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही हो। और कैलिग्राफी करते समय एक- एक शब्द बहुत ही खूबसूरती के साथ निखरकर कागज के पन्नों पर आती है। यकीन मानिए उनकी इस लिखावट को देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। अपने इस हुनर को रफ्तार देने के लिए श्यामलन प्रतिदिन 3 से 4 घंटे अभ्यास करते हैं। कहते हैं कि कैलिग्राफी अब उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया है।

श्यामलन अपने बीते दिनों को याद कर बताते हैं कि बचपन में वो सिर्फ मलयाली में कैलिग्राफी करते थे। लेकिन 10 वीं क्लास में टाइपिंग सिखने के दौरान उनके मन में एक बार ख्याल आया कि क्यों न अंग्रेजी के अक्षरों को डिफरेंट स्टाइल में कंप्यूटर से भी बेहतरीन फॉन्ट में लिखा जाए। फिर क्या था उनके ऊपर जुनून ऐसा सवार हुआ कि ये सिलसिला आजतक जारी है। श्यामलन कहते हैं कि इसके लिए मां से प्रेरणा पहले मिली और दोस्तों ने उनकी इस कला की जमकर तारीफ की, जबकि नौकरी के दौरान उनके सीनियर ऑफिसरों ने भी प्रोत्साहित किया।

केरल के एर्नाकुलम के रहने वाले श्यामलन 1982 में दिल्ली पुलिस में कॉन्सटेबल के रूप में भर्ती हुए थे। जिसके बाद श्यामलन की पोस्टिंग डीसीपी कार्यालय, पीसीआर और पीएचक्यू में अलग- अलग समय पर हुई। श्यामलन को मलयाली और ओल्ड अंग्रेजी के 12 फॉन्टों में कैलिग्राफी करने में महारत हासिल है। वह कुछ ही सेकेंड में अपनी करिश्माई कैलिग्राफी के बदौलत एक साथ कई कार्ड तैयार कर सकते हैं। उनकी कैलिग्राफी का कमाल ही ऐसा है कि कंप्यूटर का फॉन्ट भी फीका पड़ जाए। वहीं जब उनकी इस जादुई लेखनी के बारे में लिम्का की टीम को पता चला तो फिर उनके इस रिकॉर्ड को पैरामीटर से परखा गया। श्यामलन ने लिम्का की टीम के सामने एक घंटे के भीतर कैलिग्राफी की लिखावट से 80 ग्रीटिंग कार्ड तैयार करके रिकॉर्ड बना दिया। जिसके बाद प्रोमोशन पाकर हेड कॉन्स्टेबल बने श्यामलन का नाम साल 2011 में पहली बार लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। उसके बाद अपने ही रिकॉर्ड को तोड़कर नए रिकॉर्ड बनाने का सिलसिला अबतक थमा नहीं है।

श्यामलन साल 2013 में एएसआई बन चुके थे। इन्होने एक बार फिर अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए एक घंटे में 231 ग्रीटिंग्स कार्ड तैयार कर दूसरी बार लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया। अब साल 2015 में सब इंस्पेक्टर बन चुके श्यामलन ने तीसरी बार भी लिम्का बुक में अपना नाम दर्ज कराया। श्यामलन की इस कला की जानकारी जब दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग को हुई तो वो भी इनके कायल हो गए और उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया। श्यामलन बताते हैं कि दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर, डीसीपी कार्यालय या फिर एलजी हाउस में जब भी कोई समारोह होता है तो निमंत्रण पत्र पर नाम लिखने के लिए उन्हें खास तौर पर बुलाया जाता है। वो खुद अपने हाथों से इनविटेशन कार्ड तैयार करते हैं जिसके बाद कार्ड को निमंत्रण के लिए लोगों के पास भेजा जाता है। हाल ही में ‘दिल्ली पुलिस राइजिंग परेड’ के लिए श्यामलन ने 700 इनविटेशन कार्ड कैलिग्राफी के माध्यम से तैयार किये थे। उस समय भी लिम्का की टीम ने उनके इस रिकॉर्ड को परखा और चौथी बार लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए नॉमिनेट कर लिया है। अब श्यामलन को ये अवार्ड साल 2017 में दिया जाएगा।

कैलिग्राफी का यह कलाकार भक्ति में भी सराबोर है। वे कहते है - मैं जब भी कोई काम करता हूं भगवान को स्मरण करने के बाद हीं करता हूं। कैलिग्राफी करने के लिए पी. पी. श्यामलन एक या दो कलम का सहारा नहीं लेते हैं बल्कि उनके पास कुल 100 कलम हमेशा रहता है। लेकिन एक खास बात और है जिसे सुनकर और जानकर आपको हैरानी हो सकती है। और वो ये है कि कैलिग्राफी के इस उस्ताद के पास 7 कलम ऐसे हैं जो पिछले 12 सालों से उनके पास है। ये सभी कलम इंक वाली है और श्यामलन हमेशा कैलिग्राफी करने के लिए इंक पेन का ही इस्तेमाल करते हैं।

केरल के रहने वाले श्यामलन दिल्ली के मॉडल टाउन में रहते हैं, घर में पत्नी और एक बेटा है। पत्नी साइंस टीचर है तो बेटा एमबीए कर रहा है। श्यामलन कहते है कि परिवार में सभी का सपोर्ट है, मेरी कैलिग्राफी किसी के लिए आजतक बाधा नहीं बनीं। खूबसूरत कैलिग्राफी उकेरने में पत्नी की भूमिका भी अहम है जिन्होने बताया की कैसे और सुंदर कैलिग्राफी की जा सकती है। लेकिन परिवार में मेरे सिवाय किसी और को कैलिग्राफी का शौक नहीं है। बेटा थोड़ा बहुत कर लेता है, लेकिन उसे ड्रम बजाने का शौक है।

श्यामलन अपनी इस कला को आगे बढ़ाने का काम भी बखूबी कर रहे हैं। पिछले चार सालों से दिल्ली पुलिस फैमिली वेलफेयर सोसाइटी में रहने वाले बच्चों को कैलिग्राफी सिखाते आ रहे हैं। और अब इनका इरादा एलजी हाउस में रहने वाले स्टाफ के बच्चों को कैलिग्राफी सिखाने का है। श्यामलन कई स्कूल असोसिएसन और दिल्ली पुलिस के स्टडी सेंटर से भी जुड़े हुए हैं। वहां वो हर साल बच्चों को फ्री में कैलिग्राफी का कोर्स कराते हैं। इतना ही नहीं श्यामलन बेघर बच्चों को भी फ्री में कैलिग्राफी सिखाते हैं।

एक श्यामलन के कई रुप है वो सिर्फ सब-इंस्पेक्टर या खूबसूरत कैलिग्राफी उकेरने वाले शख्स नहीं हैं। बल्कि श्यामलन बेघर बच्चों के पूनर्वास के लिए समय- समय पर कैलिग्राफी का एग्जिबिशन भी लगाते हैं। साथ ही एक एनजीओ के साथ भी काम करते हैं जो कैंसर से पीड़ितों की मदद के लिए काम करती है। श्यामलन कैंसर पीड़ितों के लिए दान करने वालों को सफेद कागज पर कैलिग्राफी के माध्यम से उसका नाम और फाइट अगेंस्ट कैंसर लिखकर देते हैं। जिससे दान करने वाले भी खुश हो जाते हैं और इसी खुशी में वो कैंसर पीड़ितों के लिए दान भी कर जाते हैं। ये नेक काम वो पिछले तीन सालों के कर रहे हैं। कैलिग्राफी के अलावा श्यामलनजी को रंगोली और बॉर्डर डिजाइनिंग में भी महारथ हासिल है।

बदन पर खाकी वर्दी और कागज के पन्नों पर कमाल की कैलिग्राफी उकेरने वाले श्यामलन को मलयाली फिल्में देखना बहुत पसंद है। मलयाली फिल्मों के एक्टर ममूटी श्यामलन के पसंदीदा एक्टरों में से एक हैं और उनकी फिल्म देखना वो कभी मिस नहीं करते हैं। इतना ही नहीं श्यामलन मुकेश के गाए गानों को भी काफी पसंद करते हैं। मुकेश के गाए गाने ‘जीना यहां मरना यहां’ वो हमेशा गुनगुनाते रहते हैं।

श्यामलनजी आपके समर्पण और हुनर को सलाम।

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